ब्रुसेल्स में चिंता बढ़ रही है कि चीन से आने वाली प्रतिस्पर्धा यूरोप को औद्योगिक रूप से कमजोर कर रही है और इसे एक “जंग लगे क्षेत्र” में बदल सकती है। बीजिंग की रणनीति आक्रामक है, जिसके कारण यूरोपीय देशों की समृद्धि खतरे में पड़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खतरा वास्तविक है और यूरोपीय अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर परिणाम ला सकता है। हालांकि, यूरोपीय देशों को भी अपनी कमज़ोरियों के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है। यूरोप को इस चुनौती का सामना करने के लिए अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने की आवश्यकता है। यह स्थिति यूरोप के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। यह देखा जाना बाकी है कि यूरोप इस “चीन-शॉक” से निपटने में सफल होता है या नहीं।