मनोवैज्ञानिक आलेलेह नेजाफ़ियन के अनुसार, युवा पीढ़ी में अकेलापन बढ़ रहा है। इस वृद्धि के पीछे आभासी दुनिया, उपभोग की संस्कृति और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे कारकों का प्रभाव है। ये कारक प्रेम संबंधों को गहराई से बदल रहे हैं। नेजाफ़ियन का विश्लेषण दर्शाता है कि युवा अब पहले की तरह सामाजिक रूप से जुड़ने और भावनात्मक रूप से निवेश करने में कम सक्षम महसूस कर रहे हैं। वर्चुअल रिश्ते वास्तविक संबंधों की जगह ले रहे हैं, जिससे अकेलापन बढ़ रहा है। उपभोक्तावाद भी रिश्तों को सतही बना रहा है, जहाँ भावनात्मक जुड़ाव की बजाय भौतिक वस्तुओं को महत्व दिया जाता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के कारण भी मानवीय संपर्क कम हो रहा है, जिससे भावनात्मक अंतरंगता में कमी आ रही है। यह स्थिति प्रेम और रिश्तों की पारंपरिक धारणाओं को चुनौती दे रही है।