टीवी2 के एक नए वृत्तचित्र में यह दिखाया गया है कि गलत डाक कोड भी किसी व्यक्ति के खिलाफ भेदभाव का आधार बन सकता है। यह कार्यक्रम सामान्य मानवीय गरिमा के विरुद्ध भेदभाव के सूक्ष्म तरीकों पर प्रकाश डालता है। वृत्तचित्र में तर्क दिया गया है कि डाक कोड के आधार पर लोगों को आंकना अनुचित है, लेकिन इस समस्या का समाधान कैसे किया जाए, यह स्पष्ट नहीं है। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया है कि समाज में पूर्वाग्रह और भेदभाव कई रूपों में मौजूद हैं। यह वृत्तचित्र एक व्यंग्यात्मक दृष्टिकोण अपनाता है, लेकिन इसका संदेश गंभीर है। यह दर्शाता है कि कैसे मामूली विवरण भी सामाजिक असमानता को बढ़ा सकते हैं। कार्यक्रम दर्शकों को इस मुद्दे पर विचार करने और भेदभाव के खिलाफ खड़े होने के लिए प्रोत्साहित करता है।