एक नए अध्ययन से पता चला है कि जलवायु परिवर्तन के कारण 1970 के दशक से वैश्विक स्तर पर घातक गर्मी के खतरे में तेज़ी से वृद्धि हुई है। यह वृद्धि मानव स्वास्थ्य और उत्पादकता के लिए गंभीर चिंता का विषय है। अध्ययन में पाया गया है कि दुनिया भर में अधिक से अधिक आबादी अब ऐसे क्षेत्रों में रह रही है जहाँ गर्मी का स्तर खतरनाक है। विशेष रूप से, उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में गर्मी का खतरा सबसे अधिक बढ़ा है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी नहीं की गई, तो यह स्थिति और भी बदतर हो जाएगी। गर्मी के तनाव से हीटस्ट्रोक, निर्जलीकरण और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जिससे मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है। इस अध्ययन से जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए तत्काल कार्रवाई करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
