अप्रैल 2025 में, घरों में अनियमित ऋणों का अनुपात 3.7 प्रतिशत था। जनवरी 2026 तक, यह आंकड़ा बढ़कर 12 प्रतिशत हो गया, जो पिछले 20 वर्षों में सबसे अधिक है। यह वृद्धि परिवारों पर बढ़ते ऋण के दबाव को दर्शाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक मंदी और बढ़ती ब्याज दरें इस स्थिति के मुख्य कारण हैं। इस उछाल से बैंकों और वित्तीय संस्थानों पर भी असर पड़ने की संभावना है। कंपनियों के बीच अनियमितता की स्थिति पर भी निगरानी रखी जा रही है। सरकार इस समस्या से निपटने के लिए जल्द ही कुछ उपाय कर सकती है।
